शौच पर सोच

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23 November 2021
World toilet day

अंग्रेज़ी में एक कहावत है "out of Sight out of mind" अर्थात जो नज़रों के सामने से हटा उसे हम भूल जाते हैं। स्वक्षता के साथ भी कुछ ऐसा ही है। जबतक आँखों के सामने गन्दगी या मल दिख रहा है तबतक वो गन्दा लगता है पर जैसे ही दिखना बंद हुआ हम उसके बारे में सोचना छोड़ देते हैं कि उस गन्दगी या मल क्या हुआ, क्या उसका सही निष्पादन हुआ या फिर दिखावटी तौर पर उसे ढांप दिया गया। ऐसा इसलिए भी होता क्यूंकि या तो हम लापरवाह होते हैं या हमें सही जानकारी का अभाव है। अब शहरों में बने सेफ्टिक टैंक का ही उदाहरण ले लें, हममे से कितने लोग को ही 'सैनिटेशन वैल्यू चेन' के बारे में पता है? हममे से कितने लोग को ये पता है कि सही सेफ्टिक टैंक कैसे बनता है, उसका डिज़ाइन क्या होता है? हममे से कितने लोग को ये पता है कि सेफ्टिक टैंक सुचारु और प्रभावी रूप से काम करता रहे इसके लिए अपने सेफ्टिक टैंक की सफाई हर 3 से 5 साल के बीच करा लेनी चाहिए? हममे से कितने लोग को ये पता है कि सेफ्टिक टैंक की नियमित सफाई न कराने से एक समय ऐसा भी आता है की सेफ्टिक टैंक में, जो मल उपचार प्रक्रिया होती है वो होनी बंद हो जाएगी और बिना उपचार हुआ ठोस मल (untreated septage) नाली में सीधे आने लगेगा और स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या का कारण बनेगा? हममे से कितने लोग को ये पता है कि सेफ्टिक टैंक से निकला बिना उपचार हुआ ठोस मल (untreated septage) नाली, नालों से होता हुआ छोटी बड़ी नदियों में जाता है और नदियों को दूषित करता है?       

हमें तो बस इतना भर पता है कि लैट्रिन में पानी डाला और मल आँख के सामने से हट गया, अब वो सेप्टिक टैंक में गया, नाली में गया, नदी में गया हमको क्या पता और क्या फ़र्क़ पड़ता है। सीवर ट्रीटमेंट प्लांट या फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट भी शहरों में अभी बनने की प्रक्रिया में है, जहाँ है वो अपर्याप्त है, तो सवाल ये उठता है कि क्या हम आम जनता को इस मुद्दे के बारे में पता भी है, क्या हम इस पुरे मामले और पर्यावरणीय समस्या को समझना भी चाहते हैं? और क्या हमारी भी इसमें कोई भूमिका हो सकती है? 

World Toilet day 2021

आम तौर पर शहरी क्षेत्र में या आज कल तो गाओं में भी सेफ्टिक टैंक के नाम पर जिस तरीके का ढाँचा बन रहा है वो एक कंटेनर या बड़ा कंटेनर के अलावा कुछ नहीं है, जिसमे मल उपचार की न तो किसी तरीके की कोई प्रक्रिया होती है और न ही लम्बे समय के लिए ये सुरक्षित ही है। स्थानीय बिल्डर और ठेकेदारों को भी इससे कोई सारोकार नहीं है कि डिज़ाइन क्या और कैसी होनी चाहिए। घर के मालिक भी समझते हैं कि एक बड़ा सा कोई कमरा नुमा ढाँचा जमीन के निचे बना दो बस बन गया सेप्टिक टैंक और मिल गई 30-50 साल की छुट्टी।     

ये मुद्दा केवल व्यक्तिगत नहीं है, अपितु एक वृहद् सामाजिक और पर्यावरणीय समस्या है। प्रदुषण मुक्त हमारी नदियाँ हों ये हम सबका भी सपना है और सरकार की भी प्राथमिकता है, पर जिम्मेदारी किसी एक की ये ठीक नहीं। जितनी सरकार और सरकारी तंत्र की जिम्मेदारी है उतना ही हमारा दायित्व है कि हम आगे आये समस्या को समझे और न केवल समझे बल्कि अपनी भूमिका भी अदा करें। हमें भी समझना होगा कि कैसे होता है सही डिज़ाइन का सेफ्टिक टैंक का निर्माण, कम से कम कितने दिनों में अपने सेफ्टिक टैंक को खाली कराना जरुरी है, सेफ्टिक टैंक खाली कराने के लिए किनसे बात करनी होगी वो लोकल सेनेटरी इंस्पेक्टर भी हो सकता है वो हनी सकर (सेफ्टिक टैंक खाली कराने वाला ट्रक/ट्रैक्टर) समूह भी हो सकता है, लोकल पंचायत भी हो सकती है आदि, हमें इस बात की भी निगरानी करनी होगी कि कोई हनी सकर सेफ्टिक टैंक से ठोस मल निकाल कर कहीं इधर उधर नाली / नाले या खुले मैदान में तो नहीं डाल रहा। एकल बने घर जिनका कोई नाली निकासी मार्ग नहीं है उन घरों में सोकपिट व्यवस्था होनी होगी जबतक कि स्थानीय पंचायत या म्युनिसिपालिटी कोई ठोस व्यवस्था न कर दे। जल भराव से बचने के हर संभव प्रयास करने होंगे चाहे वो पिट के माध्यम से चाहे ऐसे पेड़ पौधे लगाकर जो ज्यादा पानी सोखते हैं या अन्य तरीके से। 

हमें ऐसे हर वो छोटे बड़े संभव प्रयास करने होंगे जिससे हम पर्यावरणीय स्वछता सुनिश्चित कर सकते हैं और जब आँख खोल कर अपने आस पास देखें तो खाली ऊपरी सफाई न दिखे अंदर गहरे में और जो नहीं दिख रहा वो भी सही मायने में स्वच्छ हो।